पहिया
पहिया, ये सूचक है रफ़्तार का , जीवन के गाडी को एक सही से पथ पे आगे
बढाने का माध्यम है पहिया | इस एक सूचक के माध्यम से हम जाने कितने जीवन के पहलूओ
पर विचार कर सकते है | पहिये से हमरा मतलब सिर्फ उसके घुमने और उसके रफ़्तार से
नहीं है इसका मतलब जीवन को संतुलित करने से भी है, जैसे की पहिया ना तो अकेले कभी
खड़ा हो सकता है और ना ही किसी की मदद से उसमे गति आ सकती है| ठीक वैसे ही जीवन के
हर मोड़ पे हमारा कोई सच्चा पथ प्रदर्शक होना भी आवश्यक है, जो हमें सही दिशा का
ज्ञान दे सके वो किसी भी रूप में हमें मिल सकता है जैसे – गुरु, मित्र, परिवार का
कोई सदस्य या कोई भी | जरूरत है वो हमें समझे और सही सलाह दे सके |
मोटे
तौर पे देखा जाए तो पहिया शब्द अपने आप में एक पहेली लिए बैठा है, और सही मायने
में जिंदगी की रफ़्तार को एक सकारात्मक सोच के साथ वही आगे बढ़ा सकता है जो इसके
पहेली की समझ जाए |
पहिये की बनावट पर
थोडा गौर करें तो इसकी इसकी तीलियाँ प्रतीक है जीवन के अलग साथ का जो हमें बांधे
रहती है और मजबूत बनती है | जीवन के हर मोड़ पे जाने कितनी परेशानियाँ हमें लक्ष्य
से विचलित कर सकती है लेकिन पहिये की धुरी हमने संभाले रहती और निरभर गति से अपने
जीवन पथ पर अग्रसर करती है और लक्ष्य तक पहुंचाती है |
पहिया जीवन चक्र का प्रतीक बन कर हमें खुद को संतुलित करने का महत्व
समझाती है |
“ उलझने तो बिखरी पड़ी है यहाँ – वहां, उन्हें कभी सुलझाओ तो ...!!
आपकी जिंदगी की पहिया बिलकुल अपने सही रफ़्तार में होगी ...
बस थोड़े सयंम के साथ खुद में सकारात्मक सोच लाओ तो || ”
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