Monday, April 20, 2015

अगर तुम ना होते

अगर तुम ना होते 

सासों का थमना और एक मेरे मासूम दिल का धडकना क्या वैसा ही होता 
अगर तुम न होते....

किसी के बारे में सोच बस झूम उठना हर वक़्त अपने इबादतों में उसे ही पाना
क्या ये ख्याल उतने ही रूहाने होते 
अगर तुम न होते.... 

क्या वो पहली बारिश में भीगना आज भी उतनी ही सौंधी होता 
अगर तुम न होते.... 

मेरा दिल तो ना जाने कबसे तनहा था 
क्या इसमें कुछ कुछ होने वाला एहसास पनप पता 
अगर तुम न होते....

हजारों की भीड़ में इन पलकों का बड़ी ही नजाकत से सिर्फ तेरी तरफ उठाना 
क्या ये गुस्ताखी बस यूँ ही हो जाती
अगर तुम ना होते.... 

धड़कते दिल से बेताबियाँ चुरा 
झट से मेरी आँखों में सात रंगों के ख्वाब भर देना
क्या ये तजुर्बा उतना ही रंगीन होता 
अगर तुम ना होते... 

बस अब तो ये कहना बाकी था 
की हमें और जीने की चाहत ना होती 
अगर तुम ना होते 
अगर तुम ना होते ...!!!!

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